गुरु

Guru-Hindi poem on Gurupurnima by sailendra kumar singh at pandulipi.net

शैलेन्द्र सिंह

ग्राफिक्स: अभिनंदन नंदा

जिसके होने से तम दूर होता
जग में चहुँ ओर फैलता उजाला है
वह हम सबका प्रिय गुरु ही है
संसार के समस्त ज्ञान का रखवाला ।
जिसके आगे सबका शीश झुकता
जिसके दर्शन से मन में फैलता उजाला है
वह संसार में एक श्रेष्ठ गुरु ही है
हमारे मन, जीवन का हलाहल हरने वाला ।
जिसके अभिनंदन से देव-ऋषि धन्य होते
हर बात में जिसका संसार देता हवाला है
वह समस्त चर-अचर में श्रेष्ठ गुरु ही है
हमें भाव-सागर से मुक्ति दिलाने वाला ।
जिसके स्मरण-मात्र से कष्टों से मुक्ति मिलती
जिसकी बातों में “शैलेन्द्र” अमृत का प्याला है
वह हमारी आत्मा, हमारा प्यारा गुरु ही है
पार्थिव-अपार्थिव का भेद बताने वाला ।

Author: admin_plipi

2 thoughts on “गुरु

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