पिता

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शैलेन्द्र कुमार सिंह

धरनी पर हमारे होने की वजह
हमारे निष्कंटक रास्तों का निर्माता
हमारा सशक्त मार्गदर्शक
हमारा हित चाहने वाला
हमारा अद्भुत रक्षा कवच
वह है तो हम हैं यही है सच ।


पिता
धरती पर सुख का निर्माता
उसकी सेवा से मनुज
स्वर्ग का सुख पाता
उसका ध्यान
हर कष्टों से मुक्ति दिलाता ।


पिता
हमारे दो सशक्त पैर
हमें मंजिल की ओर बढ़ाता
हर संकट हरकर
लेता हर बाधाओं से बैर ।


पिता
हमारी दो सशक्त भुजाएँ
दुनियाँ के सुखों को
हमारे लिए छीन लाये
हमारे जीवन को
मुस्कुराहटों से देता भर ।


पिता
हमारे मन की भावना
वह कोई भी क्षण नहीं
जब वह याद आये न
उसे याद कर हम जाते
हर दुखों से उबर ।


पिता
हमारी दो आँखे
हमें सही सच्चा रास्ता दिखाता
हमे संसार के मृगमरीचिका से निकालता
देता हमें मुस्कराहटों से भर ।


पिता
हमारी दृढ़ संकल्पशक्ति
हमारी सोचने की अद्भुत क्षमता
ऊपर से कठोर
अंदर से कोमलता
वह हमारे हर सुखों का घर।


पिता
हमारी मुस्कान
हमारी खुशियों के लिए देता प्राण
खुद की चिंता छोड़ हरपल
हमारे संकटों पर देता कान
सिर्फ और सिर्फ जीता
हमारे लिए ही जीवन भर ।


पिता
सच में धरती पर “शैलेन्द्र”
ईश्वर का जीवंत प्रतिरूप
तुम्हे बार-बार नमन है
तुम्हारे व्यक्तित्व के जैसा यहाँ
न कहीं कुछ भी अद्भुत
तुम्हारे स्मरण मात्र से ही
भू पर हमें मिल जाता स्वर्ग।

Author: admin_plipi

9 thoughts on “पिता

  1. पिता ही परमं तपः। पितृदिव्स पे विनम्र नमन।।

  2. बहुत अच्छा। पिता से बढ़ कर कोई नही। पितृ दिबस की हार्दिक सुवकामनाये।

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